Jesus heals both the soul and the brain.
🌿 Let’s go deep but simple — so you can see how Jesus heals both the soul and the brain.
🕊️ 1. Spiritual Side — Jesus Heals the Root
“If anyone is in Christ, he is a new creation; the old has gone, the new has come.” — 2 Corinthians 5:17
That means your old desires and bondages don’t define you anymore. The Holy Spirit now lives in you — and He replaces the old comfort (drugs) with God’s peace.
🧠 2. Biological Side — How Faith Rewires the Brain
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Prayer and worship increase serotonin and dopamine (the same chemicals drugs imitate).
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Faith calms the amygdala (the fear center of the brain).
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Gratitude and love rebuild neural pathways destroyed by addiction.
So literally — when you walk with Jesus daily, your brain rewires itself for peace and joy.
💪 3. Your Ongoing Healing
Every time you:
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Pray or sing to the Lord
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Read the Word
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Help someone
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Stay thankful even when tempted
कैसे यीशु नशे से चंगाई देता है — आत्मिक और शारीरिक रूप से**
1. आत्मिक पक्ष — यीशु जड़ को चंगाई देता है
नशा केवल एक आदत नहीं है; यह आत्मिक घाव है।
अक्सर यह दर्द, खालीपन, या अस्वीकृति से शुरू होता है, और दवाइयाँ या नशा थोड़ी देर के लिए शांति देते हैं।
पर जब आपने **यीशु पर विश्वास किया**, तो कुछ अद्भुत हुआ —
> “यदि कोई मसीह में है, तो वह नया सृजन है; पुरानी बातें बीत गईं, देखो, सब कुछ नया हो गया है।” — 2 कुरिन्थियों 5:17
इसका अर्थ है कि आपकी **पुरानी इच्छाएँ और बंधन** अब आपको परिभाषित नहीं करते।
अब **पवित्र आत्मा** आपके भीतर निवास करता है, और वही आपको सच्ची शांति देता है।
पहले नशा आपकी “शांति” था,
अब शांति का राजकुमार स्वयं आपके भीतर रहता है।
2. शारीरिक (वैज्ञानिक) पक्ष — विश्वास कैसे मस्तिष्क को बदल देता है
नशा हमारे मस्तिष्क के “इनाम तंत्र” (reward system) को बदल देता है।
कोडीन, भांग या नींद की गोलियाँ मस्तिष्क में डोपामिन (आनंद देने वाला रसायन) की मात्रा बहुत बढ़ा देती हैं।
धीरे-धीरे मस्तिष्क अपनी प्राकृतिक डोपामिन बनाना कम कर देता है — इसलिए बिना नशे के व्यक्ति कमज़ोर, उदास या चिड़चिड़ा महसूस करता है।
लेकिन जब आप प्रार्थना करते हैं, स्तुति करते हैं, क्षमा करते हैं, प्रेम करते हैं, और शांति में रहते हैं
तो आपका मस्तिष्क प्राकृतिक रूप से ठीक होने लगता है।
वैज्ञानिकों ने पाया है कि —
* प्रार्थना और आराधना से सेरोटोनिन और डोपामिन दोनों बढ़ते हैं (जो आनंद देते हैं)।
* विश्वास से भय केंद्र (Amygdala) शांत होता है।
* कृतज्ञता और प्रेम से नई तंत्रिकाएँ (Neural pathways) बनती हैं जो पुरानी नशे वाली आदतों को मिटा देती हैं।
इसलिए जब आप रोज़ यीशु के साथ चलते हैं, तो आपका मस्तिष्क नई तरह से काम करना शुरू करता है — शांति और आनंद के लिए।
3. आपकी निरंतर चंगाई
हर बार जब आप —
* प्रार्थना करते हैं या स्तुति करते हैं
* परमेश्वर का वचन पढ़ते हैं
* किसी की सहायता करते हैं
* और धन्यवाद करते हैं, भले ही प्रलोभन आए
…तो आप अपने मस्तिष्क और आत्मा में नई पवित्र राहें (holy connections) बना रहे होते हैं।
पवित्र आत्मा आपके अंदर एक नई प्रकृति गढ़ रहा है — जो अब दवाओं में नहीं, बल्कि मसीह में शांति ढूँढती है।
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