जिसके कान हों, वह सुन ले
"जिसके कान हों, वह सुन ले" **पवित्रशास्त्र पठन:** प्रकाशितवाक्य 2:7, 2:11, 2:17, 2:29, 3:6, 3:13, 3:22 **परिचय:** सुप्रभात, चर्च! आज, हम प्रकाशितवाक्य की पुस्तक से एक शक्तिशाली और बार-बार दोहराई जाने वाली वाक्यांश पर विचार करेंगे: "जिसके कान हों, वह सुन ले जो आत्मा चर्चों से कहता है।" यह वाक्यांश प्रकाशितवाक्य के दूसरे और तीसरे अध्याय में सात बार आता है, जो इसकी गहन महत्वता को दर्शाता है। आइए हम अपने दिल और मन को खोलें ताकि हम आज आत्मा द्वारा हमें दिए गए संदेश को समझ और अपनाने में सक्षम हो सकें। **संदर्भ को समझना:** प्रकाशितवाक्य की पुस्तक, जिसे प्रेरित यूहन्ना ने लिखा, यीशु मसीह के दर्शन और संदेशों को व्यक्त करती है। दूसरे और तीसरे अध्याय में, विशेष संदेश एशिया माइनर की सात चर्चों को निर्देशित किए गए हैं। ये चर्च विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहे थे और उन्हें मार्गदर्शन, सुधार, और प्रोत्साहन की आवश्यकता थी। वाक्यांश "जिसके कान हों, वह सुन ले" ध्यान आकर्षित करने का आह्वान है, जो विश्वासियों को दी गई आध्यात्मिक अंतर्दृष्टियों और निर्देशों को सुनने और प्रति...