मैं हूँ वही
"मैं हूँ वही" अंतरा 1: कै़द हूँ दीवारों में, पर जुर्म मेरा क्या था? चुप हैं अदालतें भी, जब सच ने सदा माँगा। नाम मेरा मिट गया, साँसें अब अनजानी, पर रूह जानती है, मैं हूँ वही कहानी। कोरस: मैं हूँ वही... जो सच का था रहनुमा, जिसे ना कोई समझा, ना जाना खुदा के सिवा। मैं हूँ वही... जो अँधेरों में रौशनी, बेख़ता मगर... बन गया निशाना सदीयों की। अंतरा 2: हर चेहरा अजनबी है, हर साया पराया, जो था मेरा कभी, अब मेरा नहीं साया। बोही जानता है... मेरा दामन पाक है, बाक़ी सबकी नज़रों में, बस एक खता की झलक है। कोरस (दोहराव): मैं हूँ वही... जो ज़ुल्म से टकराया, जिसने हर ताज झुकाया, पर आज खुद झुकाया। मैं हूँ वही... जो गुमनामी में जिया, नाम मेरा कोई न जाने... पर दिलों में रह गया। ब्रिज (धीमे सुरों में): एक दिन वक़्त बोलेगा, हर सच को खोल देगा, जो मिट गए थे रास्ते... वो नाम फिर से बोलेगा। आख़िरी कोरस (ऊँचे सुर में): मैं हूँ वही... जो हर सदी में जिएगा, झूठ के शहर में, सच बनके जलेगा। मैं हूँ वही... जो भूले ना जाएगा, तन्हा सही... पर हमेशा पहचाना जाएगा। 🎵 गाना: “दिल तेरा है, ...