जब परमेश्वर की कृपा कठिनाइयाँ लाती है

 

जब परमेश्वर की कृपा कठिनाइयाँ लाती है

📖 लूका 1:28"हे अनुग्रह प्राप्त करनेवाली, जय हो! प्रभु तेरे साथ है।"


परिचय

अक्सर लोग सोचते हैं कि जब परमेश्वर किसी को अनुग्रह या कृपा देता है, तो उसका जीवन आसान हो जाएगा। लेकिन बाइबल हमें दिखाती है कि परमेश्वर की कृपा अक्सर कठिनाइयाँ और परीक्षाएँ लेकर आती है, और इन चुनौतियों के बाद ही आशीष और बढ़ोतरी आती है। आज हम कुछ महान बाइबल पात्रों के जीवन को देखेंगे – मरियम, यूसुफ, मूसा और स्वयं प्रभु यीशु – जो परमेश्वर के अनुग्रह से भरे थे, लेकिन उन्हें कठिन संघर्षों से गुजरना पड़ा।


1. मरियम: परमेश्वर की कृपा से आया अपमान और संघर्ष

📖 लूका 1:28"हे अनुग्रह प्राप्त करनेवाली, जय हो! प्रभु तेरे साथ है।"

🔹 स्वर्गदूत ने मरियम को बताया कि वह परमेश्वर की कृपा से भरी हुई है। लेकिन यह कृपा उसके लिए आसान नहीं थी:

  • वह कुँवारी थी और गर्भवती हो गई – यह उसे समाज में अपमानित कर सकता था।
  • यूसुफ ने उसे छोड़ने की योजना बनाई (मत्ती 1:19)।
  • हेरोद राजा से बचने के लिए उसे मिस्र भागना पड़ा (मत्ती 2:13-14)।

सबक: कभी-कभी परमेश्वर की कृपा हमें कठिन परिस्थितियों में डाल सकती है, लेकिन वह हमें कभी अकेला नहीं छोड़ता।


2. यूसुफ: परमेश्वर की कृपा से आया विश्वासघात और कष्ट

📖 उत्पत्ति 39:21"परन्तु यहोवा यूसुफ के संग था, और उस पर कृपा की, और उसको कारागृह के प्रधान की दृष्टि में प्रसन्नता प्राप्त हुई।"

🔹 यूसुफ को परमेश्वर ने सपनों और भविष्यद्वाणी के अनुग्रह से आशीषित किया, लेकिन उसे:

  • अपने भाइयों द्वारा घृणा और विश्वासघात सहना पड़ा (उत्पत्ति 37:28)।
  • झूठे आरोप में जेल जाना पड़ा (उत्पत्ति 39:20)।
  • परमेश्वर की प्रतिज्ञा पूरी होने से पहले वर्षों तक इंतजार करना पड़ा।

सबक: परमेश्वर की कृपा का अर्थ त्वरित सफलता नहीं होता – पहले परीक्षा और तैयारी होती है, फिर बढ़ोतरी आती है।


3. मूसा: परमेश्वर की कृपा से आया विरोध और अस्वीकृति

📖 निर्गमन 3:10"अब आ, मैं तुझे फिरौन के पास भेजता हूँ कि तू मेरी प्रजा इस्राएलियों को मिस्र से निकाल ले आए।"

🔹 मूसा को इस्राएल का उद्धारक बनने के लिए चुना गया, लेकिन उसे:

  • अपनी ही प्रजा द्वारा अस्वीकार किया गया (निर्गमन 2:14)।
  • फिरौन का कठोर विरोध झेलना पड़ा (निर्गमन 5:2)।
  • इस्राएली लोगों की शिकायतों और विद्रोह का सामना करना पड़ा।

सबक: परमेश्वर के बुलावे और कृपा के साथ विरोध अवश्य आता है, लेकिन उसकी शक्ति हमें बनाए रखती है।


4. यीशु मसीह: परमेश्वर की कृपा से आया क्रूस

📖 लूका 2:52"और यीशु बुद्धि और डील-डौल में, और परमेश्वर और मनुष्यों के अनुग्रह में बढ़ता गया।"

🔹 यीशु पर परमेश्वर की कृपा थी, फिर भी उसे:

  • धार्मिक अगुवों से सताव सहना पड़ा
  • यहूदा के द्वारा धोखा दिया गया
  • क्रूस पर चढ़ाया गया

सबक: परमेश्वर की सबसे बड़ी कृपा सांसारिक आराम में नहीं, बल्कि अनन्त महिमा में होती है।


परमेश्वर की कृपा कठिनाइयाँ क्यों लाती है?

  1. परीक्षा हमें मजबूत बनाती है – कठिन समय हमें बड़ी आशीषों के लिए तैयार करता है।
  2. शत्रु उन्हीं पर हमला करता है जिनके पास बुलाहट होती है – शैतान परमेश्वर के जनों को रोकना चाहता है।
  3. महिमा हमेशा दुख के बाद आती है – जैसे यीशु मसीह को पहले क्रूस सहना पड़ा, फिर उसे महिमा मिली।

हमें क्या करना चाहिए?

परमेश्वर की योजना पर भरोसा करें – जब कृपा कठिनाइयाँ लाती है, याद रखें कि परमेश्वर नियंत्रण में है
धैर्य और विश्वास बनाए रखें – यूसुफ और मरियम की तरह, आज्ञाकारी बने रहें
आशीषों की प्रतीक्षा करें – परीक्षा के बाद हमेशा इनाम मिलता है (याकूब 1:12)।


निष्कर्ष

परमेश्वर की कृपा का अर्थ सुखी और चिंता-मुक्त जीवन नहीं होता। बल्कि, इसका अर्थ है कि हम उसकी दिव्य योजना का हिस्सा हैंमरियम, यूसुफ, मूसा, और यीशु सभी को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन परमेश्वर ने उन्हें विजयी बनाया। यदि आप आज कठिन समय से गुजर रहे हैं, विश्वास बनाए रखें, क्योंकि परमेश्वर की कृपा आपको महिमा की ओर ले जा रही है!

📢 प्रेरणा: क्या आप कठिनाइयों से गुजर रहे हैं, भले ही आप परमेश्वर की इच्छा में हैं? धैर्य रखें, विश्वास बनाए रखें, और जान लें कि परमेश्वर की कृपा आपको कुछ महान बना रही है!

Comments

Popular posts from this blog

The Power of Vision

As for Me and My House

Start with What You Have, Not What You Lack

Fix the Foundation Before Favor Comes

Prophetic Worship Brings Personal and Material blessing

The God of Restoration

A Biblical Study on Dreams and Their Meanings

Deaf to the Negative

Prophetic Teaching by Deacon Yachang Lalyang : “God’s Heart for Godly Offspring and the Restoration of Marriages”

When Dry Bones Live Again